दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं, संसद बनाए कानून: SC

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Supreme court of India

दागी नेताओं और गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच साल या उससे ज्यादा सजा होने वाले मामले में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने से अयोग्य करार देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोग्यता का प्रावधान अदालत नहीं जोड़ सकती। यह काम संसद का है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस मामले में प्रावधान के बारे में सोचे।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजनीतिक दलों को निर्देश दिए कि चुनाव लड़ रहे उनके जिन उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उसकी जानकारी वे अपनी वेबसाइटों और मीडिया में सार्वजनिक करें। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए संसद से भी इस समस्या से निपटने के लिए कानून बनाने का आग्रह किया, जिससे आपराधिक छवि वाले नेता विधायिका में प्रवेश नहीं कर सकें।

पढ़ें सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 मुख्य बातें

1. चुनाव लड़ने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार अपना आपराधिक रिकॉर्ड निर्वाचन आयोग के समक्ष घोषित करे

2. नागरिकों को अपने उम्मीदवारों का रिकॉर्ड जानने का अधिकार है।

3. राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के संबंध में सभी जानकारी अपनी वेबसाइटों पर डालेंगे

4. कोर्ट ने राजनीतिक दलों से जुड़े उम्मीदवारों के रिकॉर्ड का प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रचार करने का निर्देश दिया।

5. कोर्ट ने राजनीति का गैर-अपराधीकरण सुनिश्चित करने के लिए विधायिका से कानून बनाने पर विचार करने को कहा।

6. कोर्ट ने कहा, यह कानून ऐसा होना चाहिए, जो राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने के लिए बनाए जाने वाले फर्जी मामलों से भी निपटने में सक्षम हो।

7. गंभीर आपराधिक मामलों में केवल आरोप पत्र दायर होने से किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता।

8. किसी मामले में जानकारी प्राप्त होने के बाद उस पर फैसला लेना लोकतंत्र की नींव है और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का अपराधीकरण चिंतित करने वाला है।

9. हर उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करते समय पर्चे में अपने लंबित आपराधिक मामले के बारे में ‘बोल्ड’ में जानकारी देनी होगी।

10. संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला दिया। पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा भी शामिल हैं।

कितने नेताओं पर आपराधिक मामले
– 1518 नेताओं पर केस दर्ज, इसमें 50 से ज्यादा सांसद।
– 35 नेताओं पर बलात्कार, हत्या और अपहरण जैसे गंभीर आरोप।
– महाराष्ट्र के 65, बिहार के 62, पश्चिम बंगाल के 52 नेताओं पर केस। Organised Crimeor